मेरा सिलेबस और मेरी नींद का पुराना रिश्ता है... जैसे ही किताब खोलता हूँ, नींद ऐसे आती है जैसे बरसों का बिछड़ा हुआ 'यार' मिल गया हो!

मेरा सिलेबस और मेरी नींद का पुराना रिश्ता है…
जैसे ही किताब खोलता हूँ,
नींद ऐसे आती है जैसे बरसों का बिछड़ा हुआ ‘यार’ मिल गया हो!