वो जब पलकें उठाकर देखती है, तो सन्नाटा भी गुनगुनाने लगता है 🎶उसकी सादगी देखकर, शीशा भी खुद पर इतराने लगता है 🪞मैं चाँद की तारीफ करूँ भी तो कैसे करूँ इस महफ़िल में...वो बाल खोल कर आए, तो चाँद भी जल कर शर्माने लगता है ✨

वो जब पलकें उठाकर देखती है, तो सन्नाटा भी गुनगुनाने लगता है 🎶
उसकी सादगी देखकर, शीशा भी खुद पर इतराने लगता है 🪞
मैं चाँद की तारीफ करूँ भी तो कैसे करूँ इस महफ़िल में…
वो बाल खोल कर आए, तो चाँद भी जल कर शर्माने लगता है ✨